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समकालीन पाश्चात्य दर्शन का संक्षिप्त परिचय

 एम. ए. फाइनल (दर्शनशास्त्र) बृज विश्वविद्यालय के सिलेबस में सामान्यतः बीसवीं शताब्दी के कुछ प्रमुख दार्शनिक विचारों का परिचय प्रस्तुत करने का प्रयत्न किया गया है जैसे Section : A Bradley:1846-1924, England Appearance and Reality (आभास एवं सत्) : Digress of Truth and Reality (सत्य और यथार्थता के मात्रा-भेद), Doctrine of Internal Relations.(आंतरिक संबंध का सिद्धांत) Bertrand Russell  : 1872-1919 Cambridge, England Criticism of the Doctrine of Internal Relations (आंतरिक संबंध के सिद्धांत की आलोचना), Theory of Knowledge (ज्ञान का सिद्धांत), Theory of Description (विवरण सिद्धांत) , Theory of Types(प्रारूप सिद्धांत), Logical Atomism.(तार्किक परमाणुवाद) G. E. Moore: 1873-1956 Cambridge, England Refutation of Idealism(प्रत्ययवाद का खण्डन), Defence of Common-sense (सामान्य ज्ञान का बचाव), Distinction between Meaning and Analysis.(अर्थ और विश्लेषण के बीच अन्तर) Section : B Wittgenstein 1889-1951 Birth in Vienna, later from Cambridge, England Concept of Philosophy(दर्शन का स्वरूप), Phil...

ईश्वर की धारणा : गुण, मनुष्य एवं विश्व से संबंध ( भारतीय एवं पाश्चात्य)

ईश्वर की धारणा : गुण, मनुष्य एवं विश्व से संबंध ( भारतीय एवं पाश्चात्य) Notions of God : Attributes, Relation to Man and the World (Indian and Western) धर्मदर्शन में दार्शनिक विवेचन का एक प्रमुख विषय 'ईश्वर' है। धर्मों में प्राय: ईश्वर को मानवेत्तर पराशक्ति के रूप में वर्णित किया गया है जो कि चेतन शक्ति है। इसे ही विभिन्न धर्मों में सर्वोच्च सत्ता के रूप में स्थापित किया गया है। धर्मदर्शन में इस ईश्वर के संदर्भ में विभिन्न पक्षों की तर्कसंगत विवेचना की जाती है। इसे हम निम्नलिखित पक्षों में बाँटकर देख सकते हैं- (1) ईश्वर की सत्ता या अस्तित्व संबंधी समस्या ईश्वरीय अस्तित्व के संदर्भ में तीन प्रमुख अवधारणाएँ दिखायी देती है। ये हैं। (1) निरीश्वरवाद (2) अज्ञेयवाद और (3) ईश्वरवाद निरीश्वरवाद (Atheism):-निरीश्वरवाद ईश्वर में विश्वास का विरोध करता है। इस रूप में यह ईश्वरवाद का पूर्ण विरोधी सिद्धान्त है। भारतीय दार्शनिक परंपरा में जहाँ चार्वाक, जैन, बौद्ध,सांख्य और मीमांसा दर्शन इस अवधारणा का समर्थन करते हैं, वही पाश्चात्य दर्शन में तार्किक भाववादी, सार्त्र, हाइडेगर एवं नित्से जैस...